आयुर्वेद के अनुसार दिनचर्या - Ayurvedic Daily Routine | स्वस्थ्य दिनचर्या | Healthy Lifestyl . . .

आज भारत में लगभग 80 % लोग रोगी हैं । आज से 3000 वर्ष पूर्व महर्षि बागभट्ट द्वारा रचित अष्टांग हृदयं के अनुसार , बीमार व्यक्ति ही अपना सबसे अच्छा चिकित्सक हो सकता है , बीमारियों से मुक्त रहने के लिए दैनिक आहार विहार द्वारा स्वस्थ रहने के निम्न सूत्र हैं 
  
(1) सुबह उठ कर गुनगुना पानी बिना कुल्ला किए बैठ कर , घुट - घूट ( Sip - Sip
) करके पीये । एक - दो गिलास जितना आप सुविधा से पी सकें , उतने से शुरुआत करके , धीरे - धीरे बढ़ा कर सवा लिटर ( 1 - 1 / 4 Ltr . ) तक पीना है ।
(2) भोजनान्ते विषमबारी अर्थात भोजन के अंत में पानी पीना विष पीने के समान है । इस लिए खाना खाने से आधा घंटा पहले और डेढ़ घंटा बाद तक पानी नहीं पीना । डेढ़ घंटे बाद पानी जरूर पीना ।
(3)  पानी के विकल्प में आप सुबह के भोजन के बाद मौसमी फलों का ताजा रस पी सकते हैं , दोपहर के भोजन के बाद छाछ और अगर आप हृदय रोगी नहीं हैं तो आप दहीं की लस्सी भी पी सकते हैं । शाम के भोजन के बाद गर्म दूध । यह आवश्यक है की इन चीजों का क्रम उलट - पुलट मत करे ।
(4)  दोपहर का भोजन सुबह के भोजन से एक तिहाई कम करके खाएं , जैसे सुबह अगर आप तीन रोटी खाते हैं तो दोपहर को दो खाएं ।
(5)  पानी जब भी पीये बैठ कर पीये और पूँट - पँट कर पीये । फ्रिज ( रफ्रीजिरेटर ) का पानी कभी ना पियें । गर्मी के दिनो में मिट्टी के घड़े का पानी पी सकते हैं ।
(6)  सुबह का भोजन सूर्योदय के दो से तीन घंटे के अन्दर खा लेना चाहिए । अपना मनपसंद भोजन सुबह पेट भर कर खाएं ।
(7) सुबह का भोजन सूर्योदय के दो से तीन घंटे के अन्दर खा लेना चाहिए । अपना मनपसंद भोजन सुबह पेट भर कर खाएं ।
(8). दोपहर का भोजन सुबह के भोजन से एक तिहाई कम करके खाएं , जैसे सुबह अगर आप तीन रोटी खाते हैं तो दोपहर को दो खाएं ।
(9) इसके विपरीत शाम को भोजन के तुरंत बाद नहीं सोना । भोजन के बाद कम से कम 500 कदम जरूर सैर करें । संभव हो तो रात का खाना सूर्यास्त से पहले खा लें ।
(10). भोजन बनाने में फ्रिज , माइक्रोवेव ओवन , प्रैशर कूकर , तथा एल्युमिनियम के बर्तनों का प्रयोग ना करें ।
(11). खाने में रिफाइन्ड तेल का इस्तेमाल ना करें । आप जिस क्षेत्र में रहते हैं वहाँ जो तेल के बीज उगाये जाते है उसका शुद्ध तेल प्रयोग करें , जैसे यदि आपके क्षेत्र में सरसों ज्यादा होती है तो सरसों का तेल , मूंगफली होती है तो मूंगफली का तेल , नारियल है तो नारियल का तेल ।
(12). खाने में हमेशा सेंधा नमक का ही प्रयोग करना चाहिए , ना की आयोडिन युक्त नमक का । चीनी की जगह गुड़ , शक्कर या धागे वाली मिश्री का प्रयोग कर सकते है ।
(13). कोई भी नशा ना करें । चाय , काफी , मांसाहार , मैदा , बेकरी आदि उत्पादों का उपयोग नहीं करना चाहिए ।
(14). रात में सोने से पहले हल्दी वाला दूध दांत साफ़ करने के बाद ही पिए ।
(15).   सोने के समय सिर पूर्व दिशा की तरफ तथा संबंध बनाते  समय सिर दक्षिण दिशा की तरफ करना चाहिए । 
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